आज फिर तुम्हारी यादों
की पोटली को हमने खंगाला
कुछ पुरानी कहानियां निकली
कुछ पुराने शब्द मिले
कुछ फीके से खवाब
तो कुछ अधूरे पंक्तियाँ को
फिर से कविता में ढाला...
डायरी में लिपटे हुए
पैड के पत्तो को देख
हमने अपना दिन गुज़ारा
फिर से बाँधा वो इश्क का धागा
जिस पे नाम लिखा था तुम्हारा ...
नए साल और जनम दिन पर
दिए तुम्हारे तोहफे और सन्देश
तुम्हरी सागर से गहरी आँखे
तुम्हारे बादलों की तरह बिखरे केश
आज तुमसे जुडी हर चीज पर
नज़र फिराई
और पाई
अपनी ही परछाई...

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