Wednesday, October 2, 2024

इन यादों से मुक्त ना करना


 

आज फिर तुम्हारी यादों
की पोटली को हमने खंगाला
कुछ पुरानी कहानियां निकली
कुछ पुराने शब्द मिले 
कुछ  फीके से खवाब
तो कुछ अधूरे पंक्तियाँ को
फिर से कविता में  ढाला...

डायरी में  लिपटे हुए
पैड के  पत्तो को देख
हमने अपना दिन गुज़ारा
फिर से बाँधा वो इश्क का धागा
जिस पे नाम लिखा था तुम्हारा  ...

नए साल और जनम दिन पर
दिए तुम्हारे तोहफे और सन्देश
तुम्हरी सागर से गहरी आँखे
तुम्हारे बादलों की  तरह बिखरे केश
आज तुमसे जुडी हर चीज पर
नज़र फिराई
और पाई
अपनी ही परछाई...






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