इस बीच राज ने मुझसे मिस हैलो के बारे में
पूछा। मैं हैरान था कि उसे मिस हैलो के बारे में कैसे पता। राज ने बताया कि उसकी
चाची उनके घर पर काम करने जाती है और एक दिन किसी काम से वह भी उनके घर गया था। राज
ने बताया कि मिस हैलो किसी कॉलेज में प्रोफेसर है। राज ने ये भी कहा कि अगली बार
वह आएगा तो मुझसे ज़रूर मिलेगा। मुझे मन ही मन अच्छा नहीं लगा कि राज मिस हैलो के
घर गया था क्योंकि मुझे लगता था कि उनके क़रीब रहने का मौक़ा सिर्फ़ मेरा ही है।
इस बीच रीना दीदी को दिल्ली से कुछ सामान
चाहिए था तो मैं एक सप्ताह के लिए मम्मी के साथ मुरादाबाद चला गया। पूरे सप्ताह हर
वक्त मैंने सिर्फ़ मोबाइल चलाया। मम्मी और दीदी, रिश्तेदारों से मिलने
में व्यस्त थे। उन दिनों मैंने दो बड़े काम किए -पहला गेम्ज़ में अपना लेवल बहुत
हाई कर लिया और दूसरा मिस हैलो का प्रोफ़ाइल फ़ेसबुक पर ढूँढ लिया ।
उनका असली नाम अनिशा था। मैं दिन में कई बार
उनका प्रोफ़ाइल चेक करता पर वे फ़ेसबुक पर ज़्यादा एक्टिव नहीं थी। दिल्ली लौटने
पर पहले दिन ही मेरा उनसे सामना हो गया। मुझे देखते ही उन्होंने कहा “मिस्टर हेलो
कहाँ थे तुम इतने दिन”। मिस्टर हेलो नाम सुनकर मैं घबरा गया पर उन्होंने खुद ही
बता दिया कि राज ने उन्हें बताया कि मैं पूरा दिन ‘हेलो’ गेम खेलता रहता हूँ इसलिए वे मुझे इस नाम से पुकार रही है। अपने कपड़े
लेते वक्त उन्होंने कहा कि मुझे कक्षा दस में पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। उनकी बात
सुनते वक्त मैं एक शरीफ बच्चे की तरह सिर हिलाता रहा । मुझे अच्छा लगा की वह मेरी
फ़िक्र कर रही है। मैंने सोचा कि अगर कक्षा दस में पास हो गया तो उन्हें मिठाई
खिलाऊँगा। ये भी फनी था कि मैंने उनका नाम ‘मिस हैलो’ रखा और उन्होने मेरा नाम ‘ मिस्टर हेलो’-सिर्फ एक मात्रा का फ़र्क था।

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