Saturday, December 7, 2024

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 इक रोज़ मेरा दोस्त मुझसे खो गया

जब उसकी हैसियत से मैं छूटा हो गया।

बरसों बाद मेरी झोपड़ी में लौटा

और मेरे इंतज़ार में चौखट पर ही सो गया।

गले लगाया तो आंखे नम थी उसकी

उसे देख मैं भी जी भर कर रो गया।

बहुत देर कर दी थी उसने

अब तक मैं भी किसी और का हो गया

वो भी किसी और का हो गया।

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