Sunday, December 1, 2024

तारों के शहर

 







चलो तारों के शहर चलते हैं

दूर बहुत दूर

इस भीड़ सेअपना रास्ता बदलते हैं

चलो तारों के शहर चलतेहैं।

ऐसा शहर जहां दूरी का पैमाना ना हो

कोई अपना बैगाना ना हो

जहां हो हमारे साथ बढ़ते कदम

ना खुशी, ना गम

ना चाहत, ना हसरत

ना दीवारें, ना छत

बस खुला आकाश तारों से भरा

जहां तारें टूट कर भी संभलते हैं

चलो दूर बहुत दूर तारों के शहर चलते हैं।

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