Tuesday, November 5, 2024

Story 7 of Co-Mat-Ose

  18 घंटे की हवाई यात्रा के बाद जब मैं न्यू जर्सी उत्तरी तो मुझे बिलकुल भी थकान नहीं थी। प्लेन में शायद तीन चार घंटे तक सोयी होगी। सोने का मन तो किया था पर किसी भी पोजीशन में सहज नहीं थी। खिड़की से सिर सटाती तो गर्दन दर्द करती, सीट की ट्रे पर सिर रखती तो पीठ दर्द करती। एक बार तो बाजू वाले के कंधे पर भी मेरा सिर लग गया पर वह काफ़ी शांत महिला थी और कुछ नहीं बोली।



ख़ैर, फ़िल्मों के सहारे मेरा सफ़र आसानी से कट गया । बाकी  कमी हवाई जहाज के खाने और ड्रिंक्स ने पूरी कर दी। मन तो किया एक दो पेग और मार लूँ पर फिर सोचा पूरा महीने जम दारू पी रखी है,लीवर को थोड़ा आराम देती हूँ। पाँच फ़िल्मों में से एक फ़िल्म जिसने सीधे मेरे ग्रे मैटर को हिलाया, वो थी कोरियन फ़िल्म -पैरासायट। बाँग जूं हाँ की मैं हमेशा फ़ैन रही हूँ। ख़ासकर ओकेजा देखने के बाद वह मेरे पसंदीदा कलाकारों मे शामिल हो गए थे। पता नहीं पैरासायट कैसे मिस हो गयी थी। दस साल पहले जब इसे ऑस्कर मिला था, तभी मन था इसे देख लूँ पर साल 2019 को कैसे भूल सकती हूँ। क्या एक दशक काफ़ी होता है अपने अंतर्मन को बदलने में या कुछ चुनिंदा हादसे, गहरे अनुभव जो हमारे दिमाग को धक्का देते हैं, हमारी मान्यताएँ जिनसे टूट कर गिरने लगती है वे चाहिए होता है बदलने के लिए? जान डूई भी तो कहते हैं- कुछ गहरे अनुभव ही जीवन में शिक्षा देते हैं, बाकी सब तो याद भी नहीं रहता? क्या हमारा दिमाग़ चुनता है कि क्या याद रखना है और क्या नहीं? कौन सी धारणा हम साथ लेकर चलते हैं और कौन सी मान्यताओं से हमारा अंतर्मन बनता है?

 जैसे ही न्यू जरसी हवाई अड्डे से बाहर आयी तो देवेन का संदेश आया कि उसे आने में देर होगी? मुझे बाहर बस स्टेशन पर इंतज़ार करने को बोला था इसलिए मैं रास्ता पूछते हुए स्टेशन तक आ गयी। स्टेशन बिलकुल खाली था।

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