उसके उस शहर को छोड़ते ही कोडी और फिरदौस की कहानी का अंत हो गया। आज जब वह बीस साल बाद इस शहर लौटा है तो मन में ये सवाल उठ रहा है कि फिरदौस कहाँ होगी? क्या आज भी वह उसी सलीके से अपना बैग, मोबाइल, झुमके निकाल कर कमरे के एक कोने में रख देती है? क्या आज भी वह अपने प्रियतम की तस्वीर बनाती होगी? आज कोडी कहाँ होगा, उसकी वर्तमान की कहानी में कौन से किरदार होंगे? क्या वह आज भी उस काल्पनिक कहानी को खेलता होगा जिसमें खुद वह ड्राइवर बनता था और उसे कंडक्टर बनाता था? क्या वह असलियत में उस कहानी को तो नहीं जी रहा और अपने साथी परिचालक से कहता हो -बस भर चुकी है, हमें सफ़र शुरू करना चाहिए। दोपहर के दो बजे वह होटल पहुँच गया। पहले तो मन किया कुछ देर सो ले पर पता नहीं कैसे कमरे में घुसते ही कोडी और फिरदौस का चेहरा उसकी आँखों के सामने आने लगा। मन में ख़याल आया कि इस शहर में आने के बाद भी उनसे मिलने की कोशिश नहीं की, तो फिर क्या ही किया?

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