Monday, October 28, 2024

CO-MAT-OSE

 


अब उसे फिरदौस का उसके कमरे में आना पतझड़ के मौसम में किसी पत्ते के हवा में उड़ कर एक अंजान राहगीर के बालों में लिपट जाने सा लगता है। उस राहगीर ने उस पत्ते को अपना समझ अपनी डायरी में रख लिया था। ये वादे करते हुए कि अब ये पत्ता उसके जीवन का अटूट हिस्सा होगा पर हुआ वही जैसे सूखे पत्तों का होता है। डायरी में किसी पन्ने में गुम हो जाते हैं और फिर किसी दिन उन पर नज़र पड़ती है तो याद आता है कि वो भी कभी थे।  


FOR MORE, READ THE BOOK, CO-MAT-OSE

No comments:

Post a Comment